Firm क्या होता है? Firm कैसे बनाए? Firm रजिस्टर कैसे करें? Firm Kya Hota Hai?
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Firm क्या होता है? Firm कैसे बनाए? Firm रजिस्टर कैसे करें?-आज हम आपको फर्म से जुडी महत्वपूर्ण जानकारी देने जा रहे है इस पोस्ट मे आज हम आपको बताने जा रहे है की Firm कैसे बनाते है, क्या -क्या ध्यान देना में रखना चाहिए हैं, फर्म बनाने के लिये साथ ही साझेदारी फर्म क्या होती है,और कैसे बनानी चाहिये

Firm क्या होता है? Firm कैसे बनाए? Firm रजिस्टर कैसे करें?क्या-क्या शर्ते होना जरूरी है और इसके साथ ही (Partnership deed Sample format) भी देंगें।तो आइये जानते है फर्म किसे कहते है?बिज़नेस का Registration करते समय आपको अपने बिज़नेस या कंपनी का प्रकार चुनना होता है।एक कंपनी या बिज़नेस का सही प्रकार न केवल कानूनी पहलुओं के लिए उपयोगी होता है,

बल्कि कई मायनों में उपयोगी होता है। बिज़नेस कई Types के होते है इस पोस्ट में, आपको भारत में कोण कोनसे कंपनी के प्रकार या बिज़नेस  Entities होती है और उन के बारेमे जो भी जरुरी जानकारी होती है तो दोस्तों पोस्ट को शुरू करते है की Firm क्या होता है? Firm कैसे बनाए? Firm रजिस्टर कैसे करें?

Contents

फर्म क्या है? | Firm Kya Hota Hai

  • Firm Kya Hai? –सबसे पहले तो आपका यह जानना आवश्यक हैं कि आखिरकार फार्म क्या होता है और उसका काम क्या होता है।जो देश-विदेश मे व्यापार करती है, फर्म को हम सभी हिन्दी मे व्यापारिक फर्म भी कह सकते है,
  • ऐसी कोई व्यापारिक, निर्माण है जिसका व्यवसाय अनेक देशों में मजबूती से फैला हो।फर्म के अनेक अर्थ है जैसे की हम उसे Concern, Firm, Trade और व्यापारिक, निर्माण भी बोल सकते है।लेकिन क्या आप जानते है, कि फर्म भी कई प्रकार से बनाये जाते है।

फर्म कैसे बनाए?| Firm Kais Banaye

  • फर्म बनाने या खोलने से पहले आपको कुछ बातों का ध्यान रखने की चाहिए। इसी के साथ आपको यह भी जानना जरुरी है कि आखिरकार फर्म क्या होती है और उसको खोलने के लिए किन किन चीजों की जरुरत होती है।
  • अगर आपको इन सभी के बारे में पूरी जानकारी पता हैं तो फिर आप आसानी से अपना फर्म खोल पाएंगे और उसके लिए रजिस्टर कर पायेंगे। आइए जाने फर्म खोलने के लिए क्या क्या करना चाहिए



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फर्म के प्रकार | Firm types in Hindi

  • प्रोपराइटरशिप फर्म | Proprietorship Firm – एक प्रोपराइटर मालिक होता है |
  • साझेदारी फर्म | Partnership firm

1. प्रोपराइटरशिप फर्म | Proprietorship Firm

  • यह सबसे सामान्य फर्म होती है जिसे प्रोपराइटरशिप फर्म के नाम से जाना जाता है। इसमें सामान्यतया उस फर्म का मालिक एक ही व्यक्ति होता है जिसके नाम पर वह संस्थान या फर्म होती है।
  •  जो की एक प्रोपराइटरशिप फर्म केवल एक ही व्यक्ति कके द्वारा संचालित की जाती हैं और उसके लिए जिम्मेदार भी केवल वही ही होता है।

2. साझेदारी फर्म | Partnership firm

  • इस फर्म में मुख्यतया एक व्यक्ति ना होकर बल्कि कई सारे व्यक्ति उस फर्म के मालिक होते है। साझेदारी फर्म में उक्त फर्म के एक से अधिक व्यक्ति साझेदारी में मालिक होते है। ऐसे में यदि किसी व्योअर को आपने किसी के साथ पार्टनरशिप में झोला है
  • तो उसे साझेदारी फर्म के नाम से जाना जाएगा।अंग्रेजी में साझेदारी फर्म को पार्टनरशिप फर्म के नाम से जाना जाता है। यह एक तरह से सबसे प्रचलित फर्म में से एक है।
  • हालाँकि इसमें उस फर्म के कितने पार्टनर है यह निर्भर करता है। यदि उसके दो या तीन मालिक है तो इसे सामान्य पार्टनरशिप फर्म कहा जाएगा।जबकि उसके 3 से अधिक मालिक है तो उसे एसोसिएशन ऑफ पार्टनर्स फर्म का नामसे जाना जाता है

फर्म रजिस्टर कैसे करें | Firm Register Kaise Kare

  • दोस्तों फर्म को रजिस्टर करवाने के लिए।आप को ऊपर दो तरह के फर्म के प्रकार बताये गए है। तो उन्हें रजिस्टर करवाने की प्रक्रिया भी अलग अलग होती है।
  • आप अपने फर्म के एकलौते मालिक हैं तो ऐसे में फर्म की रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया सरल होती है लेकिन आप फर्म को पार्टनरशिप फर्म के रूप में रजिस्टर करवाना चाहते हैं तो इसकी प्रक्रिया थोड़ी लंबी होती हैं।
  • आइए जाने दोनों रूप में किसी फर्म रजिस्टर कैसे करवाया जा सकता हैं।

प्रोपराइटरशिप फर्म रजिस्टर कैसे करें | Proprietorship Firm Register Kaise Kare

यदि आप प्रोपराइटरशिप फर्म को रजिस्टर करवाना चाहते हैं और किसी फर्म या संस्था को अपने नाम पर रजिस्टर करवाना चाहते हैं तो उसके लिए आप को  (Proprietorship Firm Registration In Hindi) मिनिस्ट्री ऑफ कॉर्पोरेट ऑफिस की वेबसाइट पर जाना होगा या और फिर आप को उनके ऑफिस में जाकर असाधारण रूप से आवेदन करना होगा।

  • सबसे पहले आपको रजिस्ट्रार ऑफिस में जाकर अपनी फर्म का नाम रजिस्टर करवाना होगा। कहने का मतलब यह है की एक ही नाम पर दो फर्म नही बन सकती हैं। इसलिए सबसे पहले यह देखे कि आप जिस भी नाम से अपनी फर्म खोलने जा रहे हैं,क्या उसके नाम से पहले कोई अन्य फर्म बनी हुई हैं या नही।
  • अब जब आपकी फर्म का नाम रजिस्ट्रार कार्यालय से कन्फर्म हो जाए तो वहां यह नाम लिखवा ले। इसके बाद आपको मिनिस्ट्री ऑफ कॉर्पोरेट ऑफिस व्यक्तिगत रूप से जाना होगा। वहां जाकर आपको फॉर्म 16 भरना होगा।
  • यह फॉर्म 16 कंपनी अधिनियम 1956 के अंतर्गत आता है। इसके तहत ही कोई फर्म रजिस्टर करवाई जाती हैं। इसलिए इस फॉर्म को पूरा भरें।
  • इसके साथ ही आपको फॉर्म 18 भी भरना होगा जिसमें आपको फर्म से संबंधित हर जानकारी विस्तृत रूप में देनी होगी जैसे कि कंपनी का नाम, इसे खोलने का उद्देश्य, नियम, कार्यालय का पता, लाभ, हानि इत्यादि।
  • अंत में आपको अपने व कंपनी से संबंधित सभी दस्तावेज जमा करवाने होंगे। इसमें आपका पहचना पत्र, कंपनी का प्रमाण पत्र, बिजली बिल या पानी का बिल या गैस का बिल, पैन कार्ड, आधार कार्ड, आवास प्रमाण पत्र इत्यादि आवश्यक दस्तावेज।
  • यह सब भर कर आपको सभी फॉर्म सबमिट कर देने होंगे। उसके बाद मिनिस्ट्री ऑफ ऑफिस के द्वारा आपके फॉर्म के सत्यापन के लिए कुछ समय लिया जाएगा। अंत में आपकी फर्म को मान्यता दे दी जाएगी और इसके लिये एक सर्टिफिकेट भी जारी कर दिया जाएगा।

पार्टनरशिप फर्म क्या है? | Partnership Firm Kya Hai

  • एक व्यवसाय को शुरू करने और चलाने के लिए एक समझौते (agreement) की जरूरत होती है इसमें भाग लेने वाले लोग साझेदार (partner) होते हैं
  • और इस प्रकार वे फर्म को एक साझेदारी फर्म (Partnership firm) कहा जाता है, और ऐसी कंपनी का नाम फर्म (firm) नाम कहलाता है।
  • साझेदारी (Partnership) दो या दो से अधिक लोगो के बीच कुछ नियम और शर्ते है  एक साथ काम करने के लिए एक समझौता है। यह एक कानूनी इकाई नहीं है जबकि एक कंपनी (निजी या सार्वजनिक सीमित) एक कृत्रिम (Artificial) व्यक्ति है
  • एक साझेदारी केवल एक नाम है जो एक साथ काम करने वाले लोगों के समूह को दिया जाता है (भले ही यह एक पंजीकृत साझेदारी या Registered Partnership हो)।
  • इसलिए जब भी ‘फर्म की संपत्ति‘ या फर्म के खिलाफ मुकदमा जैसी शर्तों का बताया किया जाता है  तो इसका मूल रूप से यह मतलब है की ‘साझेदार की संपत्ति‘ या ‘साझेदारों के खिलाफ मुकदमा  आइए हम साझेदारी की आवश्यकता और साझेदारी के महत्व को देखें।

पार्टनरशिप फर्म रजिस्टर कैसे करें | Partnership Firm Register Kaise Kare

  • अब यदि आप किसी के साथ मिलकर या कई व्यक्तियों के साथ मिलकर पार्टनरशिप में किसी फर्म को रजिस्टर करवाना चाहते हैं तो उसके लिए भी एक प्रक्रिया है जिसका पालन आपको करना पड़ेगा।
  • हालाँकि इसके लिए भी संपूर्ण प्रकृया को मिनिस्ट्री ऑफ कॉर्पोरेट एसोसिएशन के अंतर्गत ही करना पड़ेगा लेकिन इसमें आपको कुछ अन्य चीजों के बारे में भी देखना होगा ताकि बाद में कोई समस्या ना हो।
  • आइए जाने पार्टनरशिप फर्म को पंजीकृत करवाने के लिए क्या क्या चीजों की जरुरत पड़ती हैं।

पार्टनरशिप डीड जमा करें | Partnership deed Jama Kare

  • आप के फार्म दो पार्टनर हो या उससे अधिक। उन सभी के बीच में एक अग्रीमेंट बनता ह। जिस पर सभी की हिस्सेदारी लिखी होती है। बाद में जाकर उस फर्म में जितना लाभ या हानि हुई होती हैं,
  • वह सभी पार्टनर्स को अपनी हिस्सेदारी के रूप में ही मिलता है। ऐसे में उसके लिए एक अग्रीमेंट बनाया जाता है जिसे पार्टनरशिप डीड के नाम से जाना जाता है।
  • हिंदी में पार्टनरशिप डीड को साझेदारी विलेख के नाम से जाना जाता है। एक तरह से इसमें सभी पार्टनर की जानकारी, फर्म में उनकी हिस्सेदारी (Partnership Deed Kaise Kanaye) समेत उनके हस्ताक्षर होते हैं।
  • यह फॉर्म आपको मिनिस्ट्री ऑफ कॉर्पोरेट में सबूत के तौर पर जमा करवाना होता है। इसके आधार पर उस फर्म के लिए सभी पार्टनर्स को कानूनी पहचान मिल जाती हैं।



एक व्यक्ति की कंपनी | Ek Person Ki Company

  • One Person Company’ Company Act, 2013 में पेश किया गया एक नया कंपनी प्रकार (Company Type ) है।
  • यह Company Type Single Entrepreneur या अकेले व्यवसायिकों के लिए उपयोगी है जिसमें व्यवसाय के मालिक को कंपनी पर पूर्ण नियंत्रण प्राप्त होता है।
  • इस Company Type में Owner की या बिज़नेस के मालिक की Liability ( देयता ) Limited होती है। यानि की बिज़नेस के कर्ज और नुकसान के लिए मालिक व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार नहीं होता.
  • कई प्रकार की कंपनियां जैसे की Private Limited Company या Public Limited Company शुरू करने के लिए आपको कई डायरेक्टर या सदस्यों की जरूरत होती है
  • लेकिन ‘One Person Company’ के मामले में ऐसा नहीं होता है।
  • एक अकेला व्यक्ति भी ‘One Person Company’ शुरू कर सकता है।
  • Business Owner की मृत्यु के बाद Ownership को Nominee को हस्तांतरित किया जा सकता है।
  • इस प्रकार के कंपनी में या Company Type में विदेशी Directors और विदेशी Nominee की अनुमति नहीं है।
  • इस Company का Revenue 2 करोड़ से अधिक होता है या Paid Up Capital  50 लाख से अधिक होता है तो इस Company को Private Limited Company में परिवर्तित करना पड़ता है।

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एक व्यक्ति कंपनी के लाभ

  • Company शुरू करना आसान है
  • सीमित दायित्व ( Limited Liability )
  • अकेला व्यक्ति भी Company शुरू कर सकता है
  • मालिक का कंपनी पर पूरा Control होता है
  • फैसले लेना आसान होता है

एक व्यक्ति कंपनी के हानि

  • Sole Proprietorship की तुलना में स्टार्टअप का खर्च अधिक होता है।
  • Tax Benefits नहीं मिलते।
  • आपको Audit करने की आवश्यकता होगी।
  • Equity Funding  जुटाना संभव नहीं है।

साझेदारी फर्म किसे कहते है और कैसे बनाते हैं?

  • किसी व्यापारिक वह संस्था जिसमे दो या दो से अधिक व्यक्ति मिलकर किसी व्यवसाय सुचारू रूप से लाभ और हानि हेतु एक व्यवसाय को शुरू करने और चलाने के लिए एक समझौते (Agreement) की जरूरत होती है|
  • इसमें भाग लेने वाले लोग साझेदार (Partner) होते हैं और इस प्रकार वे फर्म को एक साझेदारी फर्म (Partnership Firm) बनती है, और इसे ही Partnership Firm कहा जाता है।

साझेदारी विलेख क्या है?

  • साझेदारी फर्म बनाने के लिये फर्म के प्रत्येक सदस्य को हर मामले जैसे- (लाभ-हानि) दोनो मे बराबरी की हिस्सेदारी होती है। इसके लिये एक तरह से सभी के मध्य एक करारनामा जारी होता है,
  • जिसे हम हिन्दी मे साझेदारी विलेख (Partnership Deed) कहते है। इस विलेख में प्रत्येक पार्टनर्स लिखित रूप से आपसी सहमति अथवा ईमानदारी से सभी शर्तों को स्वीकार कर पार्टनरशिप फर्म का निर्माण करते है ।

साझेदारी विलेख कैसे बनाते है?

साझेदारी विलेख के निम्न चरण।

  • पार्टनरशिप फर्म में सबसे सभी पार्टनरों का पूरा नाम, पता अंकित होता है।
  • फर्म में किस प्रकार का और किस वस्तु का व्यापार किया जाएगा, यह भी अंकित होना आवश्यक है।
  • फर्म किस स्थान पर रजिस्टर्ड है और कहा कहा गोदाम अथवा ब्रांच है, यह भी अंकित होना, बहुत ही आवश्यक है।
  • फर्म, Partnership में कब तक चलेगी। यदि आपको कम समय के लिए साथ व्यापार करना है, तो यह भी होना आवश्यक है, जिससे समय आने पर कोई पार्टनर बेइमानी न कर सके।
  • Partnership फर्म में एक महत्वपूर्ण बात का होना बहुत ही आवश्यक है, कि किस पार्टनर ने कितना Capital Money लगाई है, साथ ही प्रत्येक पार्टनर्स की लाभ और हानि की भागीदारी कितनी क्या रहेगी ।
  • प्रत्येक पार्टनर्स की क्या जिम्मेदारी और क्या दायित्व होंगे, यह सभी प्वाइंट्स होना बहुत जरुरी है।
  • प्रत्येक पार्टनर्स की लाभ एवम् सैलरी अथवा Intrest कैसे क्या मिलेगा, यह भी होना बहुत जरूरी है।
  • प्रत्येक पार्टनर्स की शर्ते, बैंक रख-रखाव और उचित पुस्तकें, बैलेंसशीट और फर्म लेखाजोखा के प्रति कैसे क्या होंगे, यह भी अंकित होना जरूरी है।
  • इसके साथ बैंक चलाने के आपसी सहमति अथवा किसे क्या पावर देना, यह भी अंकित होना जरूरी है।
  • प्रत्येक साझेदार का प्रवेश, सेवानिवृत्ति और मृत्यु के समय सद्भावना के आधार पर गणना जैसे प्वाइंट्स का होना भी जरूरी है।
  • अंतिम बिंदु किस पार्टनर को हटाने और जोड़ने अथवा रिटायर्ड करने, साझेदारों के मध्य विवादो के मामलों जैसे प्वाइंट्स का होना भी जरूरी है।

साझेदारी विलेख में क्या क्या देखना जरुरी हैं?

पार्टनरशिप डीड बनाते समय हमे बहुत सी सावधानियां बरतनी चाहिए, क्योंकि भगवान न करे कल किसी के साथ ऐसा हो जाए कि कोई पार्टनर आपके हक को मार दे या बेईमानी कर ले, इसलिए पार्टनरशिप डीड को अच्छी तरह से सोच समझ कर ही जुड़े। अब बात करते ऐसी क्या सावधानियां रखनी चाहिए-

  • Partnership Deed बनाते समय प्रत्येक पार्टनर्स ईमानदार होना बहुत आवश्यक है, तभी साझेदारी चलेगी।
  • प्रत्येक साझेदार अपने कारोबार को बढ़ाने के साथ साथ अपने कर्तव्यों का निर्वाहन ढंग से ही करे, ऐसा करार डीड में भी होना जरुरी है।
  • साझेदार आपसी मतभेद वाला व्यक्ति न हो, तो ही साझेदारी करे।
  • साझेदारी फर्म में किसी साझेदार को जोड़ने, हटाने अथवा निष्कासित करने के प्वाइंट भी होना जरुरी है।
  • सबसे मुख्य चरण यह है कि Firm को पार्टनरशिप एक्ट के अनुसार साझेदारी फर्म को पंजीकृत करा ले, क्योंकि पार्टनरशिप फर्म में विवाद की स्थिति उत्पन्न होनें पर अनेक प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ता है
  • इसलिए हमेशा लिखित पार्टनरशिप डीड तैयार करना और फर्म को रजिस्ट्रार ऑफ फर्म के साथ रजिस्टर्ड करना ठीक होता है।।

सामान्य भागीदारी | General Partnership

सामान्य भागीदारी या General Partnership एक प्रकार की व्यावसायिक संरचना है जिसमें दो या दो से अधिक व्यक्ति व्यवसाय को शुरू करते है और Operate करते हैं।

  • इस व्यवसाय के प्रकार में बिज़नेस के हमेशा दो या उससे अधिक मालिक होते हैं।
  • जनरल पार्टनरशिप बिज़नेस Indian Partnership Act, 1932 द्वारा नियंत्रित किये हैं।
  • आपके पार्टनरशिप बिज़नेस में कम से कम 2 और अधिक से अधिक 20 सदस्य हो सकते हैं। एग्रीमेंट के मुताबिक Business का Profit और Loss भागीदारों के या Partners के बीच में Share किया जाता हैं। General Partnership के लिए, भारत में Registration Mandatory नहीं है।
  • इस प्रकार की व्यवसाय लोगों या व्यवसायियों द्वारा असीमित देयता या Unlimited Liability के कारण पसंद नहीं कि जाती है। व्यवसाय में सभी Debts (कर्ज ) और Losses ( नुकसान ) के लिए सभी Business Partners विभिन्न रूप से जिम्मेदार होते हैं।
  • Limited Liability Partnership की शुरुआत के बाद इस प्रकार की व्यावसायिक संरचना का या बिज़नेस के प्रकार का इस्तेमाल कम होता जा रहा है।




सामान्य भागीदारी के फायदे

  • इस प्रकार का व्यवसाय शुरू करना काफी आसान होता है।
  • कम खर्च में Business शुरू किया जा सकता है।
  • बिज़नेस के लिए Sole Proprietorship और One Person Company के मुकाबले अधिक Capital मिलता है
  • काम भागीदारों के बीच में Divide किया जाता है
  • ऑडिट करना जरूरी नहीं होता है
  • Registration अनिवार्य नहीं है
  • जोखिम, नुकसान और कर्ज  भागीदारों के बीच में Share किये जाते है।

सामान्य भागीदारी के नुकसान

  • असीमित देयता व्यवसाय के Partners व्यक्तिगत रूप से सभी Debts (कर्ज)और Losses (नुकसान) के लिए पूरी तरह से जिम्मेदार होता है।
  • व्यवसाय का कोई अलग से अस्तित्व नहीं होता है।
  • व्यवसाय पर आपका पूर्ण रूप से नियंत्रण नहीं रहेगा।
  • फैसले लेना मुश्किल होता है ।
  • भागीदारों के बीच टकराव या बहस होने की संभावना होती है।

फर्म खोलने के फायदे | Firm Kholne Ke Fayde

दोस्तों आप जब फर्म खोलने का सोच रहे हैं और इसके लिए इतनी लंबी चौड़ी प्रक्रिया का पालन कर रहे हैं तो जरुर ही आपके मन में यह भी आ रहा होगा कि आखिरकार अपनी कंपनी को एक फर्म के रूप में मान्यता दिलवा कर आपको क्या लाभ मिलेगा। तो आइए इसके बारे में भी जान लेते हैं।

  • सबसे पहले और प्रमुख बात तो आपके व्यापार या काम को कानूनी रूप से मान्यता मिल जाएगी।और आपके द्वारा किया गया सब काम कानूनी रूप से मान्य कहलाया जाएगा और कोई भी आप पर ऊँगली नही उठा पाएगा।
  • आपने बहुत बार देखहोगा की किसी व्यापार में जब हानि होती हैं या ज्यादा लाभ हो जाता हैं
  • तो उसके पार्टनर्स के बीच में उसको लेकर लड़ाई झगड़ा होने लगता हैं। ऐसी स्थिति से बचने के लिए उसको फर्म के रूप में रजिस्ट्रेशन करवा देना सबसे अच्छा मार्ग होता है।
  • फर्म में जो भी व्यक्ति या कर्मचारी काम कर रहे हैं उनके साथ डील करना भी बहुत आसान हो जाता है।
  • एक फर्म को सरकार के द्वारा कई तरह के कर में भी छूट प्रदान की जाती है और कई तरह की welfare योजनाओं के internal सहायता राशि भी प्रदान की जाती है।
  • लाभ व हानि का बंटवारा कानून के दायरे में रहकर किया जा सकता हैं व इसमें किसी के शक की कोई गुंजाईश नही रह जाती।

FAQs. Firm Kya Hai?

Q. पार्टनरशिप फर्म कैसे बनाये?

A. पार्टनरशिप फर्म बनाने के लिए आपको पहले साझेदारी विलेख बनाना होगा और फिर उसे लेकर मिनिस्ट्री ऑफ कॉर्पोरेट ऑफिस में जाना होगा।

Q. फर्म कितने प्रकार के होते हैं?

A. फर्म दो प्रकार की होती हैं एक सोलो फर्म व दूसरी साझेदारी फर्म।

Q. किसी फर्म का रजिस्ट्रेशन कैसे करें?

A. किसी फर्म का रजिस्ट्रेशन करने के लिए मिनिस्ट्री ऑफ ऑफिस में जाकर वहां फॉर्म सबमिट करें।

Q. फर्म का पंजीयन क्या है?

A. फर्म का पंजीयन अर्थात कानूनी रूप से मान्यता दिलवाना होता है।

आज आपने क्या सीखा

यह तक दोस्तों आज आपने सीखा की Firm क्या होता है? उम्मीद करते है की हमरे द्वारा बनाया गया ये पोस्ट आप को पसंद आया होगा यदि आप ऐसे ही और हिंदी ब्लॉग पढ़ना चाहते हैं तो आप बिलकुल सही वेबसाइट पर आये है इस तरह से आज आपने जाना कि Firm क्या होता है?, Firm रजिस्टर कैसे करवाया जा सकता है, उस Firm का क्या काम होता है, Firm कितने तरह की होती है, उसमे किसका क्या क्या हिस्सा होता है.



उसको रजिस्टर करवाने के लिए क्या क्या चीज़ की आवश्यकता पड़ती है और Firm बनाने के क्या-क्या लाभ मिलते हैं, Firm खोलने के फायदेआदि की जानकारीयो के बारे में बताया गया है आप आपने दोस्तों को भी ते पोस्ट शेयर कर सकते है पोस्ट को आखिर तक पड़ने के लिए शुक्रिया।

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